मोमोज है बीमारी का घर – एम्स

आज के समय में मोमोज अधिकतर लोग काफी पसंद करते है। मोमोज रेस्टोरेंट से लेकर स्ट्रीट पर भी आसानी से मिल जाता है। बच्चों से लेकर बड़े ही चाव से खाते है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि ये मैदा से बना होता है, जो शरीर के लिए हानिकारक होने के साथ इसके ज्यादा सेवन से शरीर में कई तरह की बीमारियां लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वहीं इसको खाते हुए भी सावधानी बरतनी की आवश्यकता होती है क्योंकि जल्दबाजी में खाने के कारण ये गले में भी फंस सकता है। मैदा से बना होने के कारण ये आसानी से पचता नहीं है। जिससे पाचन तंत्र खराब होने के साथ मोटापे को भी तेजी से बढ़ाता है

डायबिटीज

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जो मोमोज मैदे से बनते हैं उन्हें लगातार खाने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। जिसके कारण लोग डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। मोमोज को लेकर एम्स ने भी अपनी चिंता जाहिर कर दी है।एम्स के डॉक्टरों ने बताया है कि मोमोज के ज्यादा सेवन से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है

कमजोर हड्डियां 

मैदे को रिफाइंड आटा भी कहते हैं, इसे बनाने के लिए गेहूं से प्रोटीन और फाइबर को अलग कर दिया जाता है। ऐसे में जब आप मोमोज ज्यादा खाते हैं तो यही मैदा आपके शरीर में जाकर हड्डियों के कैल्शिम को भी सोखने लगता है।

टेपवर्म का खतरा

मोमोज खाने से पेट में टेपवर्म का खतरा कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि मोमोज में मिलाई जाने वाली सब्जी पत्ता गोभी को अगर ठीक से और सफाई से न पकाया जाएं, तो ये टेपवर्म दिमाग तक भी पहुंच सकते है। ये अगर दिमाग तक पहुंच जाते है, तो शरीर को कई तरह के गंभीर नुकसान हो सकते है।

कब्ज की समस्या

मोमोज खाने से कब्ज की समस्या भी बढ़ सकती है क्योंकि अधिकतर मोमोज को मैदा से बनाया जाता है, जो पेट की आंतो में जाकर चिपक जाता है और कब्ज की समस्या को भी बढ़ाता है। कई बार ठीक से न पकने के कारण भी डायरिया की समस्या हो सकती है।

कैंसर 

कुछ जगहों पर मोमोज बनाने के लिए मोनोसोडियम ग्लूटामाइन (MSG) का प्रयोग भी होता है, जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है लेकिन इससे कैंसर होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।

दिल की बीमारियां

मोमोज के साथ की चटनी में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है, इसलिए यह ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा सकता है। बीपी बढ़ने से हार्ट से संबंधित कई बीमारियां जैसे हार्ट स्ट्रोक, हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।